डा बी.आर. बाबासाहेब अम्बेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में दीक्षाभूमि पर, अपने समाज के लाखों लोगों के साथ सामूहिक धर्मदीक्षा ली। भारत में पिछड़े वर्ग के लोगों को धर्म की एक नयी पहचान दी, इसलिए ये दिन भारत के इतिहास के पन्नो में बहुत ही ऐतिहासिक दिन माना जाता, किन्तु ऐसा बिलकुल भी नहीं है की उस दिन या उसके बादके दिनों में पिछड़े समाज के आलावा किसी और समाज के व्यक्तियों ने बौद्ध धर्मदीक्षा नहीं ली। बौद्ध धर्म की अपनी सहजता के कारण लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही है जो की एक शुभ संकेत है। आशा है इन २२ प्रतिज्ञाओं को आप गौर से पड़ेंगे और विचार करेंगे,क्यूंकि ये २२ प्रतिज्ञाएँ इक्कीसवी सदी के महानायक ने बताईं हैं, तो बिना किसी पूर्वाग्रह के इन्हे पढियेगा, मित्रों। निम्न प्रतिज्ञाएं कुछ इस प्रकार हैं :-
1) मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई विश्वास नहीं करूँगा और न ही मैं उनकी पूजा करूँगा।7) मैं बुद्ध के सिद्धांतों और उपदेशों का उल्लंघन करने वाले तरीके से कार्य नहीं करूँगा।
8) मैं ब्राह्मणों द्वारा निष्पादित होने वाले किसी भी समारोह को स्वीकार नहीं करूँगा।
9) मैं मनुष्य की समानता में विश्वास करता हूँ।
10) मैं समानता स्थापित करने का प्रयास करूँगा।
11) मैं बुद्ध के आष्टांगिक मार्ग का अनुशरण करूँगा।
12) मैं बुद्ध द्वारा निर्धारित परमितों का पालन करूँगा।
13) मैं सभी जीवित प्राणियों के प्रति दया और प्यार भरी दयालुता रखूँगा तथा उनकी रक्षा करूँगा।
14) मैं चोरी नहीं करूँगा।
15) मैं झूठ नहीं बोलूँगा।
16) मैं कामुक पापों को नहीं करूँगा।
17) मैं शराब, ड्रग्स जैसे मादक पदार्थों का सेवन नहीं करूँगा।
18) मैं महान आष्टांगिक मार्ग के पालन का प्रयास करूँगा एवं सहानुभूति और प्यार भरी दयालुता का दैनिक जीवन में अभ्यास करूँगा।
19) मैं हिंदू धर्म का त्याग करता हूँ जो मानवता के लिए हानिकारक है और उन्नति और मानवता के विकास में बाधक है क्योंकि यह असमानता पर आधारित है, और स्व-धर्मं के रूप में बौद्ध धर्म को अपनाता हूँ।
20) मैं दृढ़ता के साथ यह विश्वास करता हूँ की बुद्ध का धम्म ही सच्चा धर्म है।
21) मुझे विश्वास है कि मैं फिर से जन्म ले रहा हूँ (इस धर्म परिवर्तन के द्वारा)।
22) मैं गंभीरता एवं दृढ़ता के साथ घोषित करता हूँ कि मैं इसके (धर्म परिवर्तन के) बाद अपने जीवन का बुद्ध के सिद्धांतों व शिक्षाओं एवं उनके धम्म के अनुसार मार्गदर्शन करूँगा।
:- बोधिसत्व भारतरत्न
डा. बी.आर.बाबासाहेब अम्बेडकर।




No comments:
Post a Comment