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भगवान बुद्ध की वन्दना।


ये भगवान बुद्ध वंदना, बुद्ध का नमन करने और बुद्ध, धम्म, संघ इन त्रिरत्नों की शरण जाने और गृहस्तों को पांच शीलों के पालन करने की जानकारी देती हैं। बौद्ध धर्म के मार्ग पर ये व्यक्ति के अपने हितों की रक्षा करती हैं और उसे अधर्म के कार्य करने से रोकती हैं। ये मूल पांच अत्यंत प्रभावशाली शील हैं जिनके पालन से हम बेहतर मनुष्य बन सकते हैं, प्रयास की बात है। आप किसी भी विचारधारा के पक्षधर हों, पर मै इस बात की गारंटी देता हूँ ये आपके अहित में नहीं हैं, तो इसलिए इन्हें स्वागतपूर्ण ह्रदय से पढियेगा। ये निम्न इस प्रकार हैं :- 

बुद्ध वन्दना
नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स ।
नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स ।
नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मा सम्बुद्धस्स ।

त्रिशरण
बुद्धं शरणं गच्छामि ।
धर्मं शरणं गच्छामि ।
संघं शरणं गच्छामि ।

दुतियम्पि बुद्धं सरणं गच्छामि ।
दुतियम्पि धम्म सरणं गच्छामि ।
दुतियम्पि संघ सरणं गच्छामि ।

ततियम्पि बुद्धं सरणं गच्छामि ।
ततियम्पि धम्म सरणं गच्छामि ।
ततियम्पि संघ सरणं गच्छामि ।

पंचशील
1) पाणतिपाता वेरमणी सिक्खापदं समादियामि ।

2) अदिन्नादाना वेरमणी सिक्खापदं समादियामि ।

3) कामेसु मिच्छाचारा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि।

4) मुसावादा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि ।

5) सुरा-मेरय-मज्ज-पमादट्ठानावेरमणी सिक्खापदं समादियामि ।

   ॥ भवतु सर्व मंगलं ॥

     साधू साधू साधू॥



बुद्ध वंदना (हिंदी में)

मैं भगवान अरहत सम्यक समबुद्ध को नमन करता हूँ। 
मैं भगवान अरहत सम्यक समबुद्ध को नमन करता हूँ। 
मैं भगवान अरहत सम्यक समबुद्ध को नमन करता हूँ। 

त्रिशरण
मैं बुद्ध की शरण जाता हूँ। 
मैं धम्म की शरण जाता हूँ। 
मैं संघ की शरण जाता हूँ। 

मैं दूसरी बार बुद्ध की शरण जाता हूँ।
मैं दूसरी बार धम्म की शरण जाता हूँ। 
मैं दूसरी बार संघ की शरण जाता हूँ। 


मैं तीसरी बार  बुद्ध की शरण जाता हूँ। 

मैं तीसरी बार धम्म की शरण जाता हूँ।
 
मैं तीसरी बार संघ की शरण जाता हूँ। 

पंचशील
1) मैं अकारण प्राणि-हिंसा न करने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ। 

2) मैं बिना पूर्व स्वीकृति के किसी की कोई वस्तु न लेने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ अर्थात मैं चोरी नहीं करुँगा। 

3) मैं व्यभिचार न करने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ। 

4) मैं झूठ बोलने, बकवास करने, चुगली करने से विरत रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ। 

5) मैं कच्ची या पक्की शराब, मादक द्रव्यों के सेवन, प्रमाद के स्थान से विरत रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ। 

   ।। सबका मंगल हो।। 


       साधु! साधु! साधु!



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